एक कविता हमारे ढमढेरे काका के नाम – अंजनी वाघ

एक कविता हमारे ढमढेरे काका के नाम……..

काका आप कमाल हो ,
बिल्कुल बेमिसाल हो ।
यूँ तो आपका और हमारा ,
परिचय बहुत पुराना है,
परन्तु कविता के माध्यम से,
भिन्न रूप दिखलाया है ।
बहुआयामी व्यक्तित्व आपका,
जो बोलूँ बस वो कम है,
पूरे पूर्वांचल परिसर पर ,
नाना हो रहे वायरल हैं ।
गीत, संगीत के क्षेत्र में ,
स्थान आपका ऊपर है,
अति सुंदर हैं चित्र आपके ,
रंगों में नित नया गगन है ।
वक्ता भी हैं उच्च कोटि के,
सबको इन्सपायर करते हैं,
ज्ञान, विज्ञान,सामयिक बातों से,
सबके मन को हरते हैं ।
क्या बोलूँ मैं काका आपको
शब्द पड़ रहे अब कम हैं ,
अंत में बस यही कहूँगी,
आप मास्टर ऑफ ऑल,
एण्ड जैक ऑफ नन हैं ॥

अंजनी वाघ.